कठुआ में कुदरत का कहर: बादल फटने और भूस्खलन से 7 की मौत, 100 से ज़्यादा लोगों का रेस्क्यू, कई की हालत गंभीर

🌧️ दो अलग-अलग हादसों में जानें गईं

जम्मू-कश्मीर के कठुआ ज़िले में शनिवार रात से रविवार सुबह तक प्रकृति का कहर टूटा। अधिकारियों के अनुसार, जोध घाटी में बादल फटने से आई बाढ़ में पाँच लोगों की मौत हो गई, वहीं जंगलोट क्षेत्र में भूस्खलन की चपेट में आने से दो लोगों ने दम तोड़ दिया। इन घटनाओं में कई अन्य लोग घायल हुए हैं।


🛤️ बुनियादी ढांचे को भी नुकसान

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि इस आपदा से रेलवे ट्रैक, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और एक पुलिस स्टेशन को भी क्षति पहुँची है। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन, सेना और अर्धसैनिक बल तुरंत राहत और बचाव कार्य में जुट गए हैं।


🙏 नेताओं की संवेदनाएँ

  • जितेंद्र सिंह ने X (पूर्व ट्विटर) पर शोक संदेश जारी करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
  • मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी दुख प्रकट किया और प्रशासन को तुरंत राहत पहुँचाने के निर्देश दिए। उनके कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी और घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।



⚠️ मौसम विभाग और प्रशासन की चेतावनी

कठुआ प्रशासन ने आपदा के बाद मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज़िले के कई इलाकों में “भारी से बहुत भारी वर्षा” की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, नाले या अन्य जलधाराओं के पास न जाएँ और सतर्क रहें।


📌 निष्कर्ष

कठुआ की यह घटना दिखाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक आने वाले प्राकृतिक हादसे कितने भयावह हो सकते हैं। प्रशासनिक सतर्कता और समय पर बचाव कार्य से कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं, लेकिन इस आपदा ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों की नाज़ुक स्थिति को सामने ला दिया है।

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