मेरठ टोल प्लाज़ा पर जवान की पिटाई: सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में सरूरपुर थाना क्षेत्र स्थित भूनी टोल प्लाज़ा पर हुई एक घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। यहाँ छुट्टी पूरी कर कश्मीर ड्यूटी जॉइन करने जा रहे एक जवान को टोल कर्मियों ने बेरहमी से पीटा। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

जानकारी के अनुसार, जवान कपिल सिंह (राजपूत रेजिमेंट) अपने चचेरे भाई के साथ कार से दिल्ली एयरपोर्ट जा रहे थे। उन्हें वहां से श्रीनगर रवाना होना था। टोल प्लाज़ा पर लंबा जाम लगा था और जवान ने समय बचाने के लिए कर्मियों से जल्दी निकलने की अनुमति मांगी। उन्होंने अपनी पहचान भी बताई, लेकिन टोल कर्मचारियों ने कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और बात मारपीट तक पहुंच गई।

जवान को खंभे से बाँधकर पीटा

देखते ही देखते कई टोल कर्मचारी जुट गए और जवान को खंभे से बाँध दिया। फिर लाठी, डंडे, ईंट और पत्थरों से हमला किया गया। उनका साथ देने वाले परिजनों को भी चोटें आईं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें जवान को बुरी तरह पीटे जाते हुए साफ देखा जा सकता है।

ग्रामीणों का गुस्सा और बवाल

जैसे ही आसपास के गांवों में यह खबर फैली, सैकड़ों लोग मौके पर पहुँच गए। गुस्साए ग्रामीणों ने टोल प्लाज़ा पर जमकर तोड़फोड़ की और बैरियर तोड़कर रास्ता खुलवा दिया। हालात बेकाबू होते देख भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

पुलिस ने वीडियो और शिकायतों के आधार पर कई टोल कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। बाकियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जा रही है। प्रशासन ने भी जांच शुरू कर दी है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई और टोल प्रबंधन की भूमिका क्या थी।

सेना के सम्मान को लेकर गुस्सा

इस घटना ने आम नागरिकों से लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों तक सभी को झकझोर दिया है। सवाल उठ रहा है कि देश की रक्षा करने वाला सैनिक अगर अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है, तो यह व्यवस्था पर बड़ा धब्बा है। कई संगठनों ने जवान को न्याय दिलाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बड़ा सवाल

  • क्या ड्यूटी पर जा रहे सैनिकों को टोल पर विशेष छूट और सुरक्षा मिलनी चाहिए?
  • क्या टोल प्रबंधन पर लापरवाही और मारपीट के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी?
  • और सबसे अहम, क्या ऐसी घटनाएँ हमारे सैनिकों के मनोबल को चोट नहीं पहुँचातीं?

👉 यह घटना सिर्फ एक जवान के साथ हुई मारपीट नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।

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