ज़ेलेंस्की की वॉशिंगटन यात्रा
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिलने वॉशिंगटन पहुंचने वाले हैं। यह मुलाक़ात उस समय हो रही है जब दुनिया पिछले तीन साल से चल रहे रूस–यूक्रेन युद्ध के समाधान की उम्मीद लगाए बैठी है।
इससे पहले, ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का शिखर वार्ता ने भले ही “ऐतिहासिक” कहलाने का तमगा पाया हो, लेकिन वहां से युद्ध समाप्ति की दिशा में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब सबकी नज़रें ज़ेलेंस्की–ट्रम्प बैठक पर टिकी हैं।
पिछली मुलाक़ात की कड़वी यादें
याद दिला दें कि फ़रवरी में हुई पिछली मुलाक़ात में माहौल काफी तनावपूर्ण रहा था। उस दौरान ट्रम्प ने ज़ेलेंस्की पर “अपमानजनक व्यवहार” का आरोप लगाया था, जिससे बातचीत बिगड़ गई थी। यूरोपीय नेताओं को आशंका है कि ऐसा ही टकराव दोबारा हो सकता है।
यूरोप की सक्रियता
यही कारण है कि इस बार यूरोपीय देशों ने योजना बनाई है कि ज़ेलेंस्की को अकेले ट्रम्प के सामने न छोड़ा जाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब या नाटो महासचिव मार्क रुटे में से कोई एक ज़ेलेंस्की के साथ अमेरिका जा सकते हैं। इन दोनों नेताओं के ट्रम्प के साथ बेहतर संबंध बताए जाते हैं और वे बातचीत में “डिप्लोमैटिक बफर” यानी तनाव कम करने वाले मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।
पुतिन से ट्रम्प की नज़दीकी पर चिंता
यूरोप की चिंता की एक और बड़ी वजह है—अलास्का में पुतिन को दिया गया ट्रम्प का गर्मजोशी भरा स्वागत। यूरोपीय देशों को डर है कि ट्रम्प कहीं ज़ेलेंस्की पर दबाव बनाकर रूस की शर्तों को स्वीकार न करा दें। खासकर तब, जब मार्च की मुलाक़ात की कटुता अभी भी ज़हन में ताज़ा है।
रूस का प्रस्ताव और ट्रम्प की सोच
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने प्रस्ताव दिया है कि उसे दो यूक्रेनी इलाकों पर पूरा नियंत्रण दे दिया जाए, जबकि बाकी मोर्चों को “फ्रीज़” कर दिया जाए। कहा जा रहा है कि ट्रम्प इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और उन्होंने ज़ेलेंस्की को इसे मानने का संकेत भी दिया है। लेकिन ज़ेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि वे डोनेत्स्क सहित किसी भी क्षेत्र को रूस को सौंपने के लिए तैयार नहीं हैं।
सोमवार की अहम जंग
सोमवार की बैठक को लेकर कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ है। यूरोप और यूक्रेन दोनों की कोशिश यही होगी कि ट्रम्प रूस की मांगों के आगे न झुकें और बातचीत में ऐसा कोई समझौता न हो जो यूक्रेन की संप्रभुता पर चोट करे।