
📰 पृष्ठभूमि: भारत-पाकिस्तान संघर्ष
अप्रैल 2022 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालात अचानक बिगड़ गए थे। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने बाइसारन घाटी में घूमने आए 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद दोनों देशों की सेनाओं में चार दिन तक टकराव चला। इस दौरान पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा और अंततः मई में युद्धविराम (ceasefire) की घोषणा हुई। भारत का कहना है कि संघर्षविराम पाकिस्तान की मांग पर हुआ, जबकि इस्लामाबाद ने अमेरिकी दबाव और मध्यस्थता को कारण बताया।
🌍 ट्रंप का दावा: “परमाणु जंग टलवाई”
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलास्का में हुई निरर्थक शिखर वार्ता के बाद फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाक तनाव का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा—
“भारत और पाकिस्तान पहले ही एक-दूसरे के विमान गिरा रहे थे। हालात किसी भी पल परमाणु युद्ध का रूप ले सकते थे। लेकिन मैंने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और बड़ा संकट टल गया।”
ट्रंप ने अपनी भूमिका को “ज़िंदगियाँ बचाने का प्रयास” बताते हुए कहा कि उनका मकसद हमेशा युद्ध टालना रहा है।
🇮🇳 भारत का रुख
भारत ने लगातार स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान पर पड़े सैन्य और कूटनीतिक दबाव के चलते ही संघर्षविराम हुआ। नई दिल्ली का मानना है कि अमेरिकी दखल की कोई भूमिका नहीं थी।
🇵🇰 पाकिस्तान का दावा
इसके विपरीत, पाकिस्तान ने ट्रंप की बातों का समर्थन करते हुए कई बार कहा कि अमेरिका ने ही दोनों देशों के बीच तनाव कम करवाया। विश्लेषकों का मानना है कि इस्लामाबाद ऐसा कहकर वॉशिंगटन का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहता है।
🔍 निष्कर्ष
भले ही ट्रंप अपने वैश्विक “शांति दूत” की छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच वास्तविक घटनाक्रम में उनकी भूमिका पर संदेह बना हुआ है। फिलहाल उनका बयान केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है—क्या वाकई उन्होंने परमाणु संकट टाला था, या यह सिर्फ़ उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा है?